गुरुवार, 10 नवंबर 2011

जादू भारत की प्राचीनतम 64 कलाओं में से एक आज देश भर में मुश्किल से 13 -14 अच्छे जादूगर बचे हैं.सरकार भी जादूगर को किसी भी प्रकार का कोई प्रोत्साहन नहीं देती है। बैंक में लोन लेने की सुविधा तक जादूगर के लिए नहीं है। यदि सरकार ने इस कला की ओर कोई ध्यान नहीं दिया तो यह कला दम तोड़ जाएगी।

अशोक यादव कुरुक्षेत्र
जादू भ्रम युक्त एक विज्ञान है। जादूगर सूरज जादू को भ्रम की कला युक्त एक विज्ञान मानते है, अर्थात एेसा विज्ञान जिसने जादूगर अपने हाथ की सफाई, कौशल,अभ्यास एवं सम्मोहन के द्वारा विज्ञान को अलौकिक रूप दे देता है और वही विज्ञान जादू नजर आता है। जादू भारत की प्राचीनतम 64 कलाओं में से एक है। इसकी उत्पत्ति लेटिन भाषा के मेजी शब्द से हुई है। जिसका अर्थ है भ्रमित करने की कला।
अशोक यादव  से  एक खास बातचीत में बीए तक की पढाई करने वाले 33 साल के जादूगर सम्राट जिनका बचपन का नाम उपेन्द्र जैन ने कहा कि आज जादू की कला अंतिम दिन गिन रही है और यह कला विलुप्त होती जा रही है। आज देश भर में मुश्किल से 13 -14 अच्छे जादूगर बचे हैं। जादूगर सम्राट शंकर ने तो जादू की सफाई करनी ही छोड़ दी है।
जादूगर सम्राट ने बताया कि आज किसी भी सरकार ने कला के क्षेत्र में उन्हें सम्मानित नहीं किया है। जबकि विश्व के महान क्रिकेटर कपिल देव द्वारा और बलराम जाखड़ द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया है। उन्होंने बताया कि विदेशों मेें जादू की कला को बहुत बढावा दिया जाता है और उन्होंने सरकार से मांग भी कि है कि सरकार जादूगरों पर लगने वाले मनोरंजन टैक्स को भी बंन्द करे तो बहुत अच्छा होगा क्योंकि उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राज्यस्थान, जम्मू कश्मीर और उत्तरांचल की सरकार द्वारा जादूगरों से कोई भी टैक्स नहीं लिया जाता है। सरकार भी जादूगर को किसी भी प्रकार का कोई प्रोत्साहन नहीं देती है। बैंक में लोन लेने की सुविधा तक जादूगर के लिए नहीं है। यदि सरकार ने इस कला की ओर कोई ध्यान नहीं दिया तो यह कला दम तोड़ जाएगी।
1994 में स्थानीय शहर श्री गंंगानगर में आयोजित एक फैशन शो में अपनी कला का पहला प्रदर्शन करने के बाद सम्राट सूरज ने पीछे मुडक़र नहीं देखा और धीरे-धीरे अपनी इस कला को अपना व्यवसाय बना लिया। जादूगर सूरज ने बताया कि राज्यस्थान, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश, उत्तप्रदेश,उत्तराखण्ड, जम्मू कश्मीर में 12980 शो कर चुके है। इसके अलावा थाइलैंड, मारीशस, सिंगापुर, साउथ अफ्रीका, नेपाल में भी अपनी जादुई कला का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया है। 

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पल में तोला, पल में माया, जादूगर सम्राट सूरज का मायाजाल
बड़ी-बड़ी आंखें सुन्दर व्यक्तित्व राजाआें महाराजाओं वाली बेशकीमती पौशाक पहने रंग बिरंगी चमचमाती रोशनी और मधुर संगीत के बीच जब जादूगर सम्राट सूरज अचानक प्रकट होते हैं तो मानो एेसा लगता है जैसे आसमान से बादलों की चीरता हुआ राजकुमार साक्षात धरती पर आ गया हो। 1994  में जादूगर सम्राट शंकर के शो देखकर हुई इच्छा तथा जादूगर बनने का निश्चय किया। अध्ययन के साथ - साथ मधुसूदन चौहान को गुरू बनाकर जादू के अनेक गुर सीखे। दिल्ली के प्रसिद्ध जादूगर राजकुमार और कर्नाटक के जूनियर शंकर से विशेष जादुई शिक्षा ग्रहण की।
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शो की मुख्स आइटमें
ढाई घंटे के जादुई शो के दौरान बिजली के आरे से जादूगर सूरज द्वारा खुद को दो अलग -अलग टुकड़े करना, लडक़ी को कबूतर बना देना, लडक़ी को हवा में उड़ा देना, लडक़े को लडक़ी बनाना, लडक़ी के हाथ पैर गर्दन रबड़ की तरह खींचना, खाली हाथों से नोटों की बारिश करना, गुनाहों का देवता, जापान के तीन भूतों का खेल देखकर जनता तालियां बजाने को मजबूर हो जाती है। वे ज्यादा ध्यान कपड़े बदलने की संख्या पर रखते हैं।

कुरुक्षेत्र की अनाज मण्डी मे पडा सरकारी खरीद कम्पनी कन्फेड का हजारों क्विटल गेंहू लापरवाही के चलते सढ़ गया है,

Ashok Yadav Kurukshetra
कुरुक्षेत्र की अनाज मण्डी मे पडा सरकारी खरीद कम्पनी कन्फेड  का हजारों क्विटल गेंहू लापरवाही के चलते सढ़ गया है, अप्रैल 2009  को कुरुक्षेत्र की अनाज मण्डी मे करीब 3 लाख क्विटल गेंहू जो की बोरियों मे था खरीद के बाद न उठ पाने के कारण बुरी तरह भीग गया था चुकी सरकार ये गेंहू खरीद चुकी थी लिहाजा गेंहू को स्टोर कर दिया गया  ओर उसमे से ज्यादातर गेंहू तो भारतीय खाद्य निगम ने उठा लिया लेकिन 3 साल बीत जाने के बाद भी भारतीय खाद्य निगम को इस गेंहू के भण्डार की याद नहीं आई ओर पहले से भीगा गेंहू अब बुरी तरह से सढ़ चुका है अब हालात ये है की ४९ हजार २६० क्विटल गेंहू खुले मे सड रहा है लेकिन उसे पशु भी नहीं खाते अधिकारी भी इस गेंहू मे से से २० प्रतिशत गेंहू को बिल्कुल खराब मान रहे हैं

 
कुरुक्षेत्र की अनाज मण्डी मे पडा करीब  50 हजार क्विन्टल गेंहू अधिकारियों की लापरवाही ओर अनाज की सुरक्षा के खोखले दावों की पोल खोल रहा है हरियाणा सरकार के खरीद एजेन्सी कन्फेड को इस गेंहू से करोड़ों का नुक्सान हो गया ओर भारतीय खाद्य निगम ओर जिला खाद्य आपूर्ति नियन्त्रक को चिन्ता ही नहीं पहले 2011 की गेंहू को उठवा दिया  गया ओर 2009 का स्टोक किया गेंहू सड़ता रहा  अधिकारी कुछ भी नहीं कर पाए ओर करोड़ों की गेंहू राख बन गई कन्फेड के अधिकारी पूरे मम्ले मे जिला खाद्य आपूर्ति नियन्त्रक ओर भारतीय खाद्य निगम के अधिकारियों पर दोष लगा रहे हैं
 हजार बेग गेंहू खराब होने की बात तो अधिकारी खुद मान रहे है जबकी असल आँकडा इस से कहीं ज्यादा है अधिकारी गेंहू को साफ कर के दोबारा प्रयोग योग्य बनाने का दावा कर रहे हैं लेकिन पिछ्ले ३ सलोन से बोरों मे बन्द भीगे गेंहू मे क्या बचा होगा अन्दाज लगाना  बिल्कुल आसान है,अधिकारी अपनी जम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आये, जब हमने कन्फ़ेड से बात चीत की तो उन्होंने कहा की यह जिम्मेदारी खाद्यापुर्ती विभाग व् भारतीय खाद्य निगम की है लेकिन जब उनसे बात की गई तो उन्होंने सीधा ही कहा की जिस एजेंसी की गेंहू है उसीका दायित्व बनता है, 

सोमवार, 7 नवंबर 2011

बिहार सिविल सेवा के प्रशासनिक अधिकारियों का एक दल आज कुरुक्षेत्र के दौरे पर जिला उपायुक्त श्री मनदीप सिंह बराड़


ASHOK YADAV KURUKSHETRA



कुरुक्षेत्र 06 नवबर
बिहार सिविल सेवा के प्रशासनिक अधिकारियों का एक दल आज कुरुक्षेत्र के दौरे पर पहुंचा। यह दल हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान गुडग़ांवा में हरियाणा प्रदेश के पारदर्शी प्रशासन व कार्यप्रद्धति का आंकलन करने के लिए प्रशिक्षण पर पहली बार आया हुआ है। अधिकारियों का दल कृषि, वित, पर्यटन व शहरी व  ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में हुए विकास को देाने के लिए पहुंचा है। इस दल ने आज सूचना व विज्ञान केन्द्र में जिला कुरुक्षेत्र के भूमि रिकार्ड करने की प्रणाली का अध्यन किया। जिला कुरुक्षेत्र के सभी गांवों का भूमि रिकार्ड मात्र उंगली टच करने पर कपयूटर पर देाकर अधिकारियों ने ाुशी व्यक्त की। इसके पश्चात लघु सचिवालय के निकट हैलरिस व ई दिशा केन्द्र में एक ही छत के नीचे आम जनता को दी जाने वाली सेवाओं का अध्यन किया। अधिकारियों ने ई दिशा केन्द्र में चालक लाइसेंस, वाहन पंजीकरण, नवीकरण, भूमि इन्तकाल, भूमि पंजीकरण, वरिष्ठ नागरिक पहचान पत्र व अन्य सेवाओं का बारीकी से अवलोकन किया तथा ई दिशा केन्द्र की कार्यप्रणाली के बारे में प्रश्न पूछे।
जिला उपायुक्त श्री मनदीप सिंह बराड़ ने बिहार कैडर के इन अधिकारियों का स्वागत करते हुए कहा कि हरियाणा प्रदेश में  सभी क्षेत्रों में बड़ा तेजी से विकास हुआ है। भूमि के  रिकार्ड को कपयूटर पर डालने के साथ साथ पुराने जमीन के नक्शे भी कपयूटर पर उपलब्ध करवाएं है। इस नई व्यवस्था से सरकारी कार्य में पूरी पारदर्शिता आई है। ई दिशा केन्द्र में प्रवेश करते ही सहायता व मार्गदर्शन के लिए दो कर्मचारी फाईल तैयार करने व फार्म भरने की पूरी औपचारिकताएं पूर्ण करते हैं। इससे आम आदमी को बिचौलिओं के चंगुल में फं सने की संभावना ात्म हो गई है। उन्होंने बताया कि जिला के 250 गांवों संपूर्ण स्वच्छता कार्यक्रम के तहत निर्मल घोषित किए जा चुके हैं।  इस साल के अंन्त तक सभी गांवों को निर्मल गांवों की श्रेणी में लाया जाएगा। उपायुक्त ने बताया कि धर्मक्षेत्र - कुरुक्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से विश्व का महत्वपूर्ण केन्द्र बनता जा रहा है। अधिकारियों के दल ने बाद में जिला के गांव बोहली में महिला शौचालय कापलैक्स व सांवला में कचरा प्रबन्धन परियोजना का अध्यन किया। बिहार के सिविल सेवा के अधिकारियों में अर्चना भारती, सच्चिानन्द सुमन, एम डी मुस्ताकिम, रवि प्रसाद चौहान, एम डी मन्जूर आलम, प्रियंका कुमारी, बिष्णू देव मन्डल, संदीप कुमार, राजीव रंजन, कुमार सिन्हा, रवि शंकर औरांव, अशोक कुमार मन्डल, शंकर सारण, शिव शंकर पासवान तथा राजकुमार प्रसाद शामिल थे। इस अवसर पर थानेसर के एसडीएम सतबीर कुन्डू, शाहाबाद के एसडीएम सुशील कुमार, नगराधीश अशोक बंसल व जिला सूचना विज्ञान अधिकारी श्री नरेश कुमार सिंगला भी उपस्थित थे।

गुरुवार, 3 नवंबर 2011

संचलन तो कर लिया लेकिन दर्शकों में बैठ सीटी बजाने का शौक रहा बाकी 1997 से रत्नावली का अंग रोहित सरदाना बना चुके हैं इलैक्ट्रोनिक मीडिया में विशेष पहचान...हरियाणवी की मिठास को लेकर मंच पर आई गजल

ASHOK YADAV KURUKSHETRA UNIVERSITY
कुरुक्षेत्र 03 नवम्बर
रोहित सरदाना आज इलैक्ट्रोनिक मीडिया में जाना माना नाम हो चुके हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि वह रत्नावली के पुराने धुरंधरों मेें से हैं। 3 नवम्बर को रत्नावली के दूसरे दिन सरदाना ने आडिटोरियम हाल में मंच संचालन भी किया व पुरानी यादों को सांझा किया। सरदाना के अनुसार वह रत्नावली से 1997 से लेकर 2000 तक जुड़ रहे। तब इस समारोह का नाम हरियाणा दिवस समारोह होता था। वह तब हरियाणवी एकांकी में भाग लेते थे। उन्हीं दिनों हरियाणवी व्याख्यान प्रतियोगिता भी आरम्भ की गई और अनूप लाठर के निर्देशानुसार उन्होंने इसमें भी भाग लेना आरम्भ कर दिया। उन्होंने बताया कि उन दिनों जिन्हें हरियाणवी बोलनी आती थी वह स्टेज पर आते हुए झिझकते थे और जो लोग स्टेज पर आते थे उनको हरियाणवी बोलनी कम आती थी। रत्नावली के माध्यम से उनकी झिझक को दूर किया गया और आज जो हजारों कलाकार इतने उत्साह से रत्नावली के मंचों पर भूमिका निभा रहे हैं वह अनूप लाठर द्वारा डाली गई उसी नींव का परिणाम है।
 गौरतलब है कि रोहित सरदाना कुरुक्षेत्र से ही संबंध रखते हैं और आजकल जी न्यूज में डिप्टी ऐक्सक्यूटिव प्रोड्यूसर व प्राईम टाईम ऐंकर हैं। उनके पिता जी कुरुक्षेत्र में ही गीता स्कूल में प्रिंसिपल हुआ करते थे। व वहीं से रोहित ने शिक्षा ग्रहण की। उन्होंने मीडिया मेें शुरुआत अमर उजाला से की। गुरुजंभेश्वर विश्वविद्यालय हिसार से पीजी करने के बाद वह इलैक्ट्रोनिक मीडिया में चले गए। इसमें उन्होंने अपनी शुरुआत हैदराबाद से इटीवी चैनल के डैस्क पर काम करने के साथ की। आज रत्नावली समारोह में पहुंचने पर उन्होंने कहा कि उनकी पुरानी यादें ताजा हो गई हैं। आज वह पुन: मंच संचलन तो कर रहे हैं, लेकिन दर्शकों के बीच बैठ कर वह सीटी बजाने की कशिश दिल में ही है जो शिक्षार्जन के दौरान हुआ करती थी।

हरियाणवी की मिठास को लेकर मंच पर आई गजल
ओपन ऐयर में पुरुष एकल नृत्य में युवाओं ने बिखेरे रंग


 रत्नावली समारोह के दौरान दोपहर बाद आडिटोरियम में हरियाणवी में गजल प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। गजल के माध्यम से हरियाणवी की मिठास को दर्शकों ने खूब अनुभव किया। माना जाता रहा है कि हरियाणवी अक्खड़ भाषा है, लेकिन गजलों की मिठास ने इस विचार को पूरी तरह नकारा साबित कर दिया। माता सुंदरी गल्र्ज कालेज पूंडरी की टीम ने छोड़ देंगे गाम तेरा तू रोया करैगा........बचपन प्यारा नदी किनारा वो कागज की नाव ..........शब्दों के साथ दर्शकों झूमने पर मजबूर किया। केएम गर्वनमैंट कालेज नरवाना की प्रतिभागी ने अरै बेवफा मेरी गलती बता...तनै मुंह क्यों फेरया मेरी होई के खता..........., आईबीपीजी कालेज पानीपत की टीम ने आजा के तू बैठै सामीं जी भर कै देख ल्यूं तनै........., डीएवी कालेज फार गल्र्ज यमुनानगर की टीम ने चांदनी रात मेरा जी जलावै..मनै किसे की याद सतावै....., एमएलएन कालेज यमुनानगर की टीम ने आंसू की ढाल आंसुआं ने घूट कै पड़ ज्या गा टूट कै............., युनिवर्सिटी कालेज कुरुक्षेत्र की टीम ने याद सतावै नींद ना आवै....तेरे बिना तेरे बिना ....., पीएन गल्र्ज कालेज खानपुर कलां की टीम ने मनै तू छौड़ कै पिया कित जा सै...अड़ै कोई ना मेरे मन का मेली....., गर्वनमैंट कालेज पानीपत की टीम ने मनै बेरा था वो मेरा कोण पराया था.......जिनै सुपणे मैं मैं ढूंढ़ता.........आदि शब्दों के साथ हरियाणवी को पूर्णतय: समृद्ध किया।
 उधर ओपन ऐयर थियेटर में पुरुष एकल नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें आधा दर्जन के करीब टीमों ने भाग लिया। जाट कालेज कैथल के युवा नर्तक ने दिल ले गी रै छौरी गाम की......व यूटीडी कुवि के छात्र ने हाय रै मैं किसनै सुणाऊं यू अपणे दिल का हाल.....वा छोरी नजरां के तीर चलाकै नै  करगी कमाल...........। उधर सीआरमए कालेज सोनीपत के छात्र ने के सुणाऊं रै उस छोरी का हाल.......पर अपना नृत्य प्रस्तुत किया। अहीर पीजी कालेज रेवाड़ी के छात्र ने एक पोरी बरगी छौरी मेरा रंग चिढ़ावै सै...एक मेरे हाण की छोरी नखरे दिखावै सै........के साथ नृत्य पर तालियां बटोरी। प्रतियोगिता सांय तक जारी रही। दोपहर बाद क्रश हाल में प्राचीन वस्तुओं की प्रर्दशनी लगी। विभिन्न कालेजों से आए विद्यर्थियों ने अपने स्तर पर जुटाई गई पुरातन वस्तुओं को इसमें प्रदर्शित किया। इन वस्तुओं को देखने में जहां युवा वर्ग ने रूचि दिखाई वहीं दूर दराज से आए बुजुर्गों ने भी संग्रहित वस्तुओं को देख अपने पुराने दिनों को ताजा किया। प्रर्दशनी में पुरतन सिक्के, हुक्के, कपड़े, सितार आदि प्राचीन वद्ययंत्र, प्राचीन बर्तन, मापतोल के साधन, आजादी की क्रांति मेंं अहम भूमिका निभाने वाला खादी का जनक चर्खा व बड़े बड़े फूलदान विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रहे। 

हरियाणवी पॉप की रंगारंग प्रस्तुतियों ने किया रत्नावली का आगाज



ASHOK YADAV KURUKSHETRA
कुरुक्षेत्र 01 नवम्बर
कुरुक्षेत्र विश्ववविद्यालय द्वारा आयोजित रत्नवावली प्रतियोगिता का 26वां आयोजन पूर्व की भांति हरियाणवी पॉप की पहली प्रस्तुति के साथ आरम्भ हुआ और दोपहर बाद तक श्री मद्भगवत गीता सदन तालियों व संगीत की आवाजों से गूंजता रहा। प्रतियोगिता में कुल प्रदेश भर से 9 टीमों ने भाग लिया। सबसे पहले मंच पर पूर्व वर्ष की ओवर आल विजेता टीम डीएवी ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति कुछ इस प्रकार दी....भाभी चाल़ा होग्या री....। आरके एस डी कालेज कैथल की टीम ने जेठ मेरा दस पढरह्या सै है...मेरा देवर बीए पास..उतणी का अणपढ रहग्या हे जैऐ रोए नै रोप दिया चाल़ा.... की प्रस्तुतियों पर दर्शकों को हाल में झूमने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम के प्रति दर्शकों में इतना उत्साह रहा कि प्रतियोगिता के समापन तक हाल ठसा-ठस भरा रहा।
ओपन ऐयर  थियेटर में स्किट के माध्य से चुनावों पर हुए व्यंग्य
रत्नावली समारोह के पहले दिन ओपन ऐयर थियेटर में हरियाणवी हास्य नाटिकाओं की प्रतियोगिता आयोजित हुइ जिसमें प्रदेश भर से 15 टीमों ने भाग लिया। कमोबेश अधिकतर नाटिकाओं में व्यंग्य का विषय चुनाव और सामाजिक मुद्दे ही रहे। डीएवी कालेज यमुनानगर की टीम ने विक्रम बेताल स्किट का मंचन किया। पानीपत इंस्टीट्यूट आफ इंजिनियरिंग एण्ड टैक्रालाजी की टीम ने महिला उत्पीडन पर अपनी प्रस्तुति दी। इसी मंच से चुटकुला प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में कुल 10 टीमों ने भाग लिया। ठेठ हरियाणवी अंदाज के चुटकुलों और उनके प्रस्तुतिकरण ने श्रोताओं को हंसाकर लोटपोट कर दिया।
आरके सदन में हरियाणवी भजनों ने किया भक्ति रस का प्रवाह
रत्नावली समारोह के पहले दिन कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के आरके सदन में हरियाणवी भजन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में कुल 15 टीमों ने भाग लिया। मंच पर पहले आइ कुवि की टीम ने कृष्ण मुरारी सुनो म्हारी अर्ज........भजन की प्रस्तुति दी। उसके पश्चात डीएवी कालेज यमुनानगर की टीम ने धर्म छौडकै बंदे तनै पछताणा होगा....... सांई के दरबार मैं जाणा होगा रै.............., गर्वनमैंट पीजी कालेज करनाल की टीम ने अपना भजन ऋषि मुनी और ज्ञानी प्रभू ध्यावैं सांझ सबेरे तनै.. की प्रस्तुतियां दी। सभी प्रतिभागियों ने अपने गायन में इतना मीठापन जताया कि श्रोता प्रतियोगिता के समापन तक बंधे बैठे रहे।
सीनेट हाल में हुआ हरियाणवी में चिंतन
रत्नावली समारोह के पहले दिन सीनेट हाल में आयोजित हरियाणवी व्याख्यान प्रतियोगिता में प्रदेश भर से 17 टीमों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने अपने विचारों में ज्वलंत समस्याओं पर चिंतन किया और श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया। कौण कहवै सै हरियाणा सै कला क्षेत्र मैं बांझ...बिन रखवाली टूट जावै सै बड़े-बड़े रै बांध विषय पर कुवि यूटीडी के ऋषि ने अपना व्याख्यान दिया। जीबीएम कलेज की छात्रा गीत ने मंहगाई पर अपने विचार रखे। अधिकतर प्रतिभागियों ने भ्रूण हत्या को विषय बनाया व अपने तरीके से इस समस्या का विश्लेश्ण किया। नम्बर 1 हरियाणा पर भी प्रतिभागियों ने अपने व्याख्यान प्रस्तुत किये। भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय खानपुर कलां की प्रतिभागी मीनू ने हरियाणा की संस्कृति को अपने विचारों के माध्यम से नम्बर वन दिखाया। 

मंगलवार, 1 नवंबर 2011

छात्रा ने लगाई फांसी, हरियाणा के एकमात्र सरकारी कालेज श्रीकृष्णा राजकीय आयुर्वैदिक कालेज की छात्रा ने अपने कमरे नंबर 44 में फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। कमरे नंबर 44 में मिला अप्पति जनक फोटो

Ashok Yadav Kurukshetra
 
 छात्रा ने लगाई फांसी, हरियाणा के एकमात्र सरकारी कालेज श्रीकृष्णा राजकीय आयुर्वैदिक कालेज की छात्रा ने अपने कमरे नंबर 44 में  फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। कमरे नंबर 44 में मिला अप्पति जनक फोटो 
वीओ ०१..... श्रीकृष्णा राजकीय आयुर्वैदिक कालेज में बी ए एम एस प्रोप 3 की जूनियर छात्रा  आरती निवासी सिरसा  ने वर्ष 2008 में श्रीकृष्णा राजकीय आयुर्वैदिक कालेज कुरुक्षेत्र में प्रवेश लिया था और कालेज परिसर के साथ ही बने महिला छात्रावास की दूसरी मंजिल पर कमरा नं. 44 में रह रही थी। पिछले दिनों दिवाली के छुट्टियां बिताकर आरती कल सांय ही घर से छात्रावास में पंहुची थी। छात्रावास में रहने वाली अन्य लड़कियों ने बताया कि आरती ने रात को भोजन नहीं किया था तो किसी ने ध्यान नहीं दिया क्योंकि अक्सर बच्चे घर से आते समय कुछ न कुछ खाने का सामान साथ ले आते हैं।  
 सुबह जब एक अन्य लडक़ी के पास आरती के भाई का फोन आया तो उसने बताया कि पहले मैंने आरती की रुममेट के पास फोन किया था तो वह अपने घर मिली और उसने ही आपका नम्बर दिया है आरती फोन नहीं उठा रही है प्लीज आप एक बार बात करा दो तब मैंने अन्य लड़कियों के साथ जाकर दरवाजा खटखटाया लेकिन तब भी अन्दर से कोई आवाज न मिलने पर हमने वार्डन को बताया तब वार्डन ने साथ लगते कमरे को खुलवाकर पीछे जाकर आरती के कमरे की खिडक़ी से झांक कर देखा तो सभी सन्न रह गए। आरती ने कमरे में लगे पंखे से चुन्नी के साथ फांसी ले रखी थी।
 
  इस घटना के बारे में कालेज के प्राचार्य डॉ. वी वी छिक्कारा के अनुसार उसका किसी से कोई गहरा झगड़ा तो नहीं था लेकिन कई बार छोटी छोटी बातों पर गुस्सा जरुर आ जाता था सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मृतका इससे पहले भी आत्महत्या का प्रयास कर चुकी थी.
 
 मृतक के पिता के अनुसार आरती पिछले दिनों दिवाली के छुट्टियां बिताने अपने घर भी गयी थी और घर से ठीक अपने हॉस्टल में गयी थी मगर किन कारन से उसने फांसी ले ली है उन्हें नहीं पता क्या कारन है ...
  

रत्नावली का आगाज आज से कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में जुटेंगे प्रदेशभर से 3000 प्रतिभागी लगेगा लोक संस्कृति का मेला रत्नावाली की वैब्साईट तैयार


कुरुक्षेत्र, 1 नवम्बर
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले प्रदेश स्तरीय हरियाणवी संस्कृति के महाकुम्भ रत्नावली का आगाज बुधवार 2 नवम्बर से होने जा रहा है। अपने 26वें वर्ष में रत्नावली जहां परंपरा के अनुसार नई विधा के रूप में सांगीत (हरियाणा के लोक नाट्य सांग का पुराना नाम सांगीत था) संध्या को लेकर आ रही है। इसके साथ ही इस बार चौपाल विधा को प्रतियोगिता के रूप में शामिल किया जा रहा है। इस सम्बंध में विस्तृत जानकारी देते हुए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक विभाग के निदेशक अनूप लाठर ने अपने कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि इस बार नई विधा के रूप में सांगीत का प्रयोग किया जा रहा है जिसमें ब्रज की चौपाई, रसिया, पटका,  व चमौला आदि की प्रस्तुतियां होंगी। हरियाणा में करीब 500 धुनें हैं जिनमेंसे उनके पास 150 हरियाणवी धुनों का संकल्न है।
 अनूप लाठर ने बताया कि रत्नावली के हर सुनहरे पलों को  विश्वव के किसी भी कोने में बैठ कर सांझा कर सकते हैं। इसके लियेे नई तकनीक का भी प्रयोग हो रहा है। इंटरनैट के माध्यम से फेसबुक पर, ब्लाग व मेल के माध्यम से रत्नावली का प्रसार हो रहा है। रत्नावली के मंच से उपजी प्रतिभाएं आज विभिन्न मीडिया संस्थानों में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा चुकी हैं। उनमें से शुभा जोकि शाहरूख खान के साथ एड फिल्मों में काम कर रही हैं, शोभना रावत आदि कई प्रतिभाऐं इस बार रत्नावली में आ रही हैं। उन्होंने बताया कि कलाकारों केे इस महाकुम्भ में कुलपति डा. डीडीएस संधु मुख्यअतिथि के रूप में अपना आर्शिवाद देंगे और हरियाणा के ख्याति प्राप्त मुक्केबाज मनोज कुमार भी अपने कोच राजेश व अपने परिवार सहित 2 नवम्बर को रत्नावली समारोह में पहुंच रहे हैं। विश्वविद्यालय की तरफ से हरियाणा व आसपास के राज्यों के करीब 16 विश्वविद्यालयों को हरियाणवी संस्कृति के इस माहकुम्भ में शिरकत करने के लिये न्यौता भेजा गया है। संभावना है कि इस समारोह में दो दर्जन के करीब विधाओं में 3000 प्रतिभागी भाग लेंगे।
 उन्होंने कहा कि रत्नावली एक उत्सव व समारोह मात्र नहीं अपितु यह एक सांस्कृतिक यज्ञ है जिसमें प्रदेश के हजारों युवा अपनी आहूति डालते हैं। यह एक सांस्कृतिक प्रयोगशाला है जिसमें हरियाणवी संस्कृति को लेकर अनेक सफल प्रयोग हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार विख्यात वैज्ञानिक ऐडीसन ने अपने नाम 1096 पेटैंट करवाऐ व यह विचार दिया कि किसी खोज का असफल होना भी यह बताता है कि अगर कोई प्रयोग असफल हुआ तो यह साबित हो जाता है कि इससे क्या नहीं हो सकता। उसी प्रकार हमने रत्नावली मे अपने प्रयोगों को सफलता की कसौटी पर नहीं देखा बल्कि संस्कृति को समृद्ध करने के लिये जो भी लगा उसी को रत्नावली का हिस्सा बनाने का प्रयास किया।

रत्नावाली की वैब्साईट तैयार

अनूप लाठर ने बताया कि रत्नावली की अलग वैब्साईट डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू  डाट रत्नावली डाट नेट के नाम से तैयार हो चुकी है। इस पर सभी प्रकार की हरियाणवी वीडियो, नाटक आदि उपलब्ध होंगे और उनको निशुल्क डाऊनलोड करने की छूट होगी।

अब हरियाणा से बाहर भी होगा रत्नावली का प्रसार

अनूप लाठर के अनुसार इस बार कई टीमें रत्नावली पर विशेष कवरेज तैयार करेंगी व हरियाणा से बाहर तक इसका प्रसार होगा। उन्होंने बताया कि पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला, गुरुगोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय दिल्ली, चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय सिरसा, डीएवी कालेज यमुनानगर व कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्यौगिकी संस्थान की टीमें 4 दिन रत्नावली पर विशेष पैकेज तैयार करेंगी। 
हरियाणवी में पहली काटून चित्रकथा का होगा विमोचन

अनूप लाठर ने बताया कि उनकी टीम हरियाणी में काटून चित्रकथा पर काम कर रही है। सर्प दमन नाम इस पुस्तक की कथा उनके  द्वारा स्वंय लिखी गई है और चित्रांकन सहित अन्य सभी कार्य सुकेत कलागृह के साथ सुनील कौशिक कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस की कथावस्तु एक लोक कथा पर आधारित है। इसका विमोचन भी संभवत: रत्नावली के दौरान किया जाऐगा।